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Showing posts from April, 2019

एक कचरा बीनने वाला बालक बना क्रिकेट जगत का "सिक्सर मशीन"

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एक कचरा बीनने वाला बालक बना क्रिकेट जगत का "सिक्सर मशीन" क्रिकेट जगत में ऐसी कई विभूतियाँ हुईं जिन्होंने अपनी कड़ी मेहनत के बाद एक बड़ा मुकाम हासिल किया।  इनमे से एक चेहरा है क्रिस गेल का।  ये आज वेस्ट इंडीज़ के साथ विश्व के महान " सिक्सर मशीन" के नाम से प्रसिद्द हैं।  क्रिस्टोफर हेनरी गेल 21 सितम्बर 1979 में किंग्स्टन, जमैका में एक बेहद गरीब परिवार में जन्में थे।  इनके सदा मुस्कुराते चेहरे के पीछे इनकी बेहद गरीबी का राज़ छुपा है।  एक छोटे से झोपड़ी नुमां मकान में अपने परिवार के साथ बिताये दिनों को याद कर वे काफी गंभीर हो जाते हैं।  अक्सर वे कचरा बिन कर अपने परिवार के खर्चों को पूरा किया करते।  कई बार तो इन्होने छोटी-मोटी चोरियां भी कीं।  ऐसी स्थिति में वे अपनी पढ़ाई भी पूरी नहीं कर पाए।  गरीबी और भुखमरी के हालात में भी इनके भीतर क्रिकेट का जूनून सवार हुआ और ये स्थानीय लुकास क्रिकेट क्लब से जुड़े और निकल पड़े अपने जूनून को पाने के लिए। सितम्बर 1999 में इन्हें भारत के विरुद्ध पहले ODI में खेलने का मौका मिला और मार्च 2000 में इन्होने ज़िम्ब...

एक कॉलेज ड्रॉपआउट के प्रयास ने जोड़ा पूरे विश्व को

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एक कॉलेज ड्रॉपआउट के प्रयास ने जोड़ा पूरे विश्व को यूं तो दुनियाँ में हर दिन हज़ारो लोग पैदा होते हैं लेकिन उनमे से कुछ ऐसे होते हैं जो पूरी दुनियाँ को ही बदल देते हैं।  ये बात बिलकुल सटीक बैठती है फेसबुक के जन्मदाता मार्क ज़ुकेरबर्ग पर। जिन्होंने अपने जीवन में जो उपलब्धियां पाईं वो किसी भी सामान्य व्यक्ति के लिए एक सपने जैसी ही है।  मार्क को बचपन से ही कंप्यूटर से कुछ विशेष लगाव था। और बहुत ही छोटी  उम्र में  ही ये छोटे-मोटे प्रोग्राम लिखने लगे थे। इसमें इनके पिता भी इनकी बहुत मदद किया करते थे। अपनी तेज बुद्धि के कारण वे अपने टीचर को भी बड़ी मुश्किलों में डालते थे। मात्र 12 साल की ही उम्र में मार्क ने ZukNet Messenger बनाया था जिसे वे अपने पिता से उनके क्लिनिक में बात करने के लिए करते थे। जिस उम्र में बच्चे कंप्यूटर गेम में आनंद लेते, वहीँ मार्क कंप्यूटर गेम बनाने में ही सफल हो गए थे। उनकी कुशाग्र बुद्धि के चलते इन्हें हॉवर्ड यूनिवर्सिटी में दाखला मिल गया।  और वे जल्द ही वहाँ प्रोग्रामिंग एक्सपर्ट के नाम से प्रसिद्द हो गए।   उन दिनों उ...

IAS-IPS हैं ये चारों भाई-बहन, 2 कमरे के मकान में रहकर पूरी की थी पढ़ाई

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प्रतापगढ़ के लालगंज तहसील के रहने वाले अनिल मिश्रा को एक ही तमन्ना थी कि उनके चारों बच्चे बड़े होकर उनका नाम रोशन करें। हुआ भी यही, चारों ने देश की सर्वोच्च सेवाओं के एग्जाम को क्वालीफाई किया। चार भाई बहन में सबसे बड़े हैं योगेश मिश्रा, जो IAS हैं। इस समय कोलकाता में राष्ट्रीय तोप एवं गोला निर्माण में प्रशासनिक अधिकारी हैं। 2nd नंबर पर हैं बहन क्षमा मिश्रा, जो IPS हैं। वर्तमान में कर्नाटका में पोस्टेड हैं। 3rd नंबर पर हैं माधवी मिश्रा, जो झारखंड कैडर की IAS हैं। इस समय केंद्र के विशेष प्रतिनियुक्ति पर दिल्ली में तैनात हैं। 4th नंबर पर हैं लोकेश मिश्रा, जो IAS हैं। इस समय बिहार के चंपारण जिले में ट्रेनिंग कर रहे हैं। सबसे बड़े भाई योगेश ने बताया, IAS होने से पहले वो सॉफ्टवेयर इंजीनियर थे और नोएडा में तैनात थे। उस समय उनकी दोनों बहनें क्षमा-माधवी दिल्ली में प्रशासनिक सेवाओं की तैयारी कर रही थीं। रक्षाबंधन के एक दिन पहले दोनों के एग्जाम का रिजल्ट आया और वो फेल हो गईं। उसके एक दिन बाद मैं राखी बंधवाने बहनों के पास गया और उनका हौसला बढ़ाया। उसी दिन ठान लिया कि सबसे पहले खुद IAS ...