एक कॉलेज ड्रॉपआउट के प्रयास ने जोड़ा पूरे विश्व को
एक कॉलेज ड्रॉपआउट के प्रयास ने जोड़ा पूरे विश्व को
यूं तो दुनियाँ में हर दिन हज़ारो लोग पैदा होते हैं लेकिन उनमे से कुछ ऐसे होते हैं जो पूरी दुनियाँ को ही बदल देते हैं। ये बात बिलकुल सटीक बैठती है फेसबुक के जन्मदाता मार्क ज़ुकेरबर्ग पर। जिन्होंने अपने जीवन में जो उपलब्धियां पाईं वो किसी भी सामान्य व्यक्ति के लिए एक सपने जैसी ही है।
मार्क को बचपन से ही कंप्यूटर से कुछ विशेष लगाव था। और बहुत ही छोटी उम्र में ही ये छोटे-मोटे प्रोग्राम लिखने लगे थे। इसमें इनके पिता भी इनकी बहुत मदद किया करते थे। अपनी तेज बुद्धि के कारण वे अपने टीचर को भी बड़ी मुश्किलों में डालते थे। मात्र 12 साल की ही उम्र में मार्क ने ZukNet Messenger बनाया था जिसे वे अपने पिता से उनके क्लिनिक में बात करने के लिए करते थे। जिस उम्र में बच्चे कंप्यूटर गेम में आनंद लेते, वहीँ मार्क कंप्यूटर गेम बनाने में ही सफल हो गए थे। उनकी कुशाग्र बुद्धि के चलते इन्हें हॉवर्ड यूनिवर्सिटी में दाखला मिल गया। और वे जल्द ही वहाँ प्रोग्रामिंग एक्सपर्ट के नाम से प्रसिद्द हो गए।
उन दिनों उनके कॉलेज में फेसबुक्स नाम की एक किताब होती थी जिसमे सभी छात्रों की उनके चित्र समेत सभी जानकारियां होती थीं। कुछ ऐसा ही विचार कर मार्क ने Facemash नामक एक वेबसाइट बनाई। इस वेबसाइट की खास बात थी की ये लड़के और लड़कियों के फोटोज़ को आमने-सामने रख कर उनकी हर दृष्टि से तुलना करता था और बताता था की कौन उनमे सबसे ख़ास है। इस वेबसाइट के लिए विशेष तौर पर लड़कियों की फोटोज़ को इकठ्ठा करने के लिए मार्क ने हॉवर्ड यूनिवर्सिटी को ही हैक कर लिया था। जिसके लिए उन्हें अच्छी खासी झाड़ भी पड़ी थी। जल्द ही Facemash ने काफी लोकप्रियता हासिल कर ली। लेकिन कॉलेज की लड़कियों ने इसे आपत्तिजनक बता कर इसका कड़ा विरोध किया। आगे चलकर मार्क ने अपनी यूनिवर्सिटी में The Facebook नाम से एक नयी वेबसाइट बनाई जो धीरे-धीरे अन्य यूनिवर्सिटीज में भी लोकप्रिय होने लगी। इस बात से प्रेरित होकर मार्क ने इसे छात्रों के आलावा आम लोगों तक भी पहुँचाया । जिसके लिए मार्क ने बीच में ही अपनी पढ़ाई छोड़ दी और अपनी टीम के साथ जुट गए अपनी वेबसाइट को और मज़बूत बनाने पर। और साल 2005 में इस वेबसाइट के नाम को बदल कर Facebook रख दिया गया। साल दो साल के भीतर ही इसपर लाखों बिज़नेस पेज और प्रोफाइल बन चुके थे। साल 2011 के आते-आते ये दुनियाँ की सबसे बड़ी वेबसाइट बन गयी। और इसके साथ ही मार्क ज़ुकेरबर्ग भी इंटरनेट के बादशाह बन गए। मार्क ने जब Facebook का साइट बनाया, तब उनकी उम्र केवल 19 साल की थी। इतनी छोटी उम्र में ही मार्क ने पूरी दुनियाँ को एक कड़ी से जोड़ दिया। इसके साथ ही मार्क दुनियाँ के सबसे युवा अरबपतियों की सूची में भी आ गए।
मार्क की इस उपलब्धि से एक बात तो निश्चित रूप से कही जा सकती है की जो व्यक्ति सफलता के प्रति आशावादी और आत्मविश्वासी होते हैं वही जीवन की ऊँचाईओं पर पहुँचते हैं। मार्क हमेशा ही अपने आपको एक हैकर ही मानते आये हैं क्योंकि उनका कहना है की हम किसी भी बात की तह तक नहीं पहुँच पाएंगे जब तक की हम उसे पूरी तरह तोड़ न दें, या यूं कहें की उसे पूरी तरह जान न लें। मार्क की इसी सोच ने ही इन्हें इतना सफल बनाया।

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